ये जरुरी तो नहीं – अनुज शुक्ल

ये जरुरी तो नहीं……..ख्वाबों में तेरा दीदार करु,मैं टूटकर तुझसे प्यार करु,पर तु भी मुझसे प्यार करेंये जरुरी तो नहीं…….. माना तुम्हारे हजारों दिवाने है जमाने में,पर… Read more “ये जरुरी तो नहीं – अनुज शुक्ल”

ज़िंदगी तेरे नख़रे भी हजार है

ज़िंदगी तेरे नख़रे भी हजार है  क्यों तुम्हे दर्द से इतना प्यार है  कलम लिखने को बहुत बेक़रार है  क्योंकि इश्क खुद ही आज बीमार है  ज़िंदगी… Read more “ज़िंदगी तेरे नख़रे भी हजार है”

मुक्तक – सुबह जैसे ही आँख खुलती है

सुबह जैसे ही आँख खुलती है मानो एक शिकायत किया करती है भोर होते ही क्यू छोड़ देता है मुझको मेरी तनहाई मुझसे यही सवाल किया करती… Read more “मुक्तक – सुबह जैसे ही आँख खुलती है”

मुक्तक – तेरे चाहने वालों की बहुत आबादी है

तेरे चाहने वालों की बहुत आबादी है पर ‘निल्को’ को कहा लिखने पर पाबंदी है ये टूटे फूटे मन के भावो को पढ़कर भी लोग कहते है… Read more “मुक्तक – तेरे चाहने वालों की बहुत आबादी है”

मुक्तक – नज़र निल्को की मैंने शीर्षक ही रख लिया

दिल मे कोई प्रेम रत्न धन रख लिया उनके लिए लिख , उनका भी मन रख लिया ऐसी नजरों से घूरते है वो मुझको की ‘नज़र निल्को… Read more “मुक्तक – नज़र निल्को की मैंने शीर्षक ही रख लिया”

मुक्तक – चाँद की चादनी मे नहाती रही

चाँद की चादनी मे नहाती रही सारी रात मुझे वो जगाती रही प्यार से ज़रा छु लिया था होठो को उसके और ‘निल्को’ की धुन वो अब… Read more “मुक्तक – चाँद की चादनी मे नहाती रही”

आलू पर कविता नहीं होता

कृपया ध्यान दे …! मधुलेश पाण्डेय “निल्को” की यह एक वयंगात्मक रचना है, इसका उद्देशय किसी तो ठेस पहुचाना बिलकुल नहीं है। ये कविता पढ़ना माना एक जुर्म है, पर… Read more “आलू पर कविता नहीं होता”

रातों के आईने को, मेरा सलाम करना

तेरे प्यार के महल में, वादे तमाम करना हो जाऊँ कैद उसमे ,कुछ इंतजाम करना धड़कन की हो दीवारें,साँसों की हो कतारेंसो जाऊं मैं सुकूँ से,दिले-एहतिमाम करना                                  … Read more “रातों के आईने को, मेरा सलाम करना”

खुले मंच पर देता हूँ चुनौती

हमारे मेसेज को पढ़कर के ग्रुप में आया एक तूफान कुछ लोगो के दिल मेंउठ गई एक उफानपलटकर दिया उन्होंने जवाबजैसे हड्डी बीच कवाबखुले मंच पर देता… Read more “खुले मंच पर देता हूँ चुनौती”

ये चन्द लाइने लिखने से क्या फ़ायदा- एम के पाण्डेय ‘निल्को’

‘ए दोस्त’ ज़रा मुझ पर रहमत की नज़र रखना मै भी तुंहरा ही हूँ इसकी तो खबर रखना  मुझ जैसे डूबने वालों को अब तेरा सहारा है… Read more “ये चन्द लाइने लिखने से क्या फ़ायदा- एम के पाण्डेय ‘निल्को’”

थोड़ा तो ठहर – एम के पाण्डेय निल्को

चेतावनी – दोस्तो आज एक मनगढ़त रचना आप के सामने पेश कर रहा हूँ इसका किसी भी जीवित व्यक्ति से कोई भी सम्बंध नहीं है यदि ऐसा… Read more “थोड़ा तो ठहर – एम के पाण्डेय निल्को”

इश्क है तो इश्क का इजहार होना चाहिये – मुनव्वर राना

इश्क है तो इश्क का इजहार होना चाहिये  आपको चेहरे से भी बीमार होना चाहिये आप दरिया हैं तो फिर इस वक्त हम खतरे में हैं  आप… Read more “इश्क है तो इश्क का इजहार होना चाहिये – मुनव्वर राना”

शिक्षा , शिक्षार्थी, शिक्षक और शिक्षा व्यवस्था

किसी भी राष्ट्र का आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक विकास उस देश की शिक्षा पर निर्भर करता है। शिक्षा के अनेक आयाम हैं, जो राष्ट्रीय विकास में शिक्षा के… Read more “शिक्षा , शिक्षार्थी, शिक्षक और शिक्षा व्यवस्था”

शिक्षा – अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’

शिक्षा है सब काल कल्प-लतिका-सम न्यारी; कामद, सरस महान, सुधा-सिंचित, अति प्यारी। शिक्षा है वह धारा, बहा जिस पर रस-सोता; शिक्षा है वह कला, कलित जिससे जग… Read more “शिक्षा – अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’”