पराया हमें वो बताने लगे हैं

इशारे से सब कुछ जताने लगे हैंमुझे अपना अब वो बनाने लगे हैं। उठाया है मैने जिन्हें ज़िन्दगी भर,वही आज मुझको गिराने लगे हैं। बताते थे ख़ुद… Read more “पराया हमें वो बताने लगे हैं”

चांद अपनी चांदनी की रंगतों से डर गया

दिल हमारा जब तुम्हारी चाहतों से भर गया ।चांद अपनी चांदनी की रंगतों से डर गया ।। तेरी यादों में मेरे दिन रात कटते थे मगर।मेरी नजरों… Read more “चांद अपनी चांदनी की रंगतों से डर गया”

क्या प्रेम में शारीरीक संबंध जरूरी होता है? 

प्रेम में शारीरिक संबंध जरुरी है…क्योंकि शरीर की यादाश्त होती हैं…जिस प्रकार एक नव्जन्मा शिशु भी अपनी अपनी मां का स्पर्श पहचानता हैं…चाहे आंखे बन्द हो पर… Read more “क्या प्रेम में शारीरीक संबंध जरूरी होता है? “

ये चन्द लाइने लिखने से क्या फ़ायदा- एम के पाण्डेय ‘निल्को’

‘ए दोस्त’ ज़रा मुझ पर रहमत की नज़र रखना मै भी तुंहरा ही हूँ इसकी तो खबर रखना  मुझ जैसे डूबने वालों को अब तेरा सहारा है… Read more “ये चन्द लाइने लिखने से क्या फ़ायदा- एम के पाण्डेय ‘निल्को’”

थोड़ा तो ठहर – एम के पाण्डेय निल्को

चेतावनी – दोस्तो आज एक मनगढ़त रचना आप के सामने पेश कर रहा हूँ इसका किसी भी जीवित व्यक्ति से कोई भी सम्बंध नहीं है यदि ऐसा… Read more “थोड़ा तो ठहर – एम के पाण्डेय निल्को”

लालबहादुर शास्त्री – सादा जीवन, उच्च विचार

आज भारत को जय जवान जय किसान का नारा देने वाले देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्मदिन है। सादा जीवन और उच्च विचार कहने… Read more “लालबहादुर शास्त्री – सादा जीवन, उच्च विचार”

नज़र निल्को की – तेरी नज़दीक वाली दूरिया

तेरी नज़दीक वाली दूरिया लगती है जैसे गोलिया तेरी हर अदा कुछ ख़ास नहीं पर सहती है हर एक बोलिया उसका बनना और सवरना जैसे हो पानी… Read more “नज़र निल्को की – तेरी नज़दीक वाली दूरिया”

तेरी याद मुझे क्यों सताती है

तेरी याद मुझे क्यों सताती है तन्हाई में क्यों रुलाती है जब जब मिलते है हम पता नहीं क्या आखो से वो पिलाती है उसका नशा जैसे… Read more “तेरी याद मुझे क्यों सताती है”

कन्या हत्या सर्वाधिक भारत मे

नवरात्रि के पवन पर्व पर कन्याए जिमाई जाती है ढुढ़ते है घर घर उनको फिर पूजन करी जाती है कन्या हत्या सर्वाधिक भारत मे फिर भी देवी… Read more “कन्या हत्या सर्वाधिक भारत मे”

सोच रहा हूँ कोई कविता गाऊँ – एम के पाण्डेय ‘निल्को’

समय पर जब यह समय मिला  उनके लिए ही यह गीत बुना मुलाकात जब उनसे हुई  मानो बंजारे को घर मिला देखा उनको जब आज के दिन… Read more “सोच रहा हूँ कोई कविता गाऊँ – एम के पाण्डेय ‘निल्को’”

चेहरे की वो बात – एम के पाण्डेय ‘निल्को’

चेहरे की वो बात अधूरी रह गई थी रात किनारे बैठे थे वे साथ डाले एक दूसरे मे हाथ कह रहे थे सुन रहे थे एक दूसरे… Read more “चेहरे की वो बात – एम के पाण्डेय ‘निल्को’”

लिखता हूँ बचपन की वो कहानी – एम के पाण्डेय ‘निल्को’

बचपन की वो दुनिया पचपन की उम्र में भी नहीं भूलती क्योंकि जो की थी शरारते वो भी कुछ नहीं कहती ।।   न तो लोग बुरा… Read more “लिखता हूँ बचपन की वो कहानी – एम के पाण्डेय ‘निल्को’”

एम के पाण्डेय ‘निल्को’ की कविता – वो दूरिया बढ़ाते गए

वो दूरिया बढ़ाते गए और कुछ लोग यह देख कर मुस्कुराते गए इस ज़िंदगी के कशमकश में शायद ‘निल्को’ को वो भुलाते गए जब याद दिन वो… Read more “एम के पाण्डेय ‘निल्को’ की कविता – वो दूरिया बढ़ाते गए”

जिजीविषा 2……डायरी के पीले पन्ने (ii) -Tripurendra Ojha ‘nIshaan’

गतांक से आगे,,,,                     सुबह के नौ बजे मै उठा सर दर्द सा महसूस हो रहा था , सीधे छत पर पहुंचा | घना कुहरा गिरा था ,… Read more “जिजीविषा 2……डायरी के पीले पन्ने (ii) -Tripurendra Ojha ‘nIshaan’”