ज़िन्दगी है एक पहेली – एम के पाण्डेय निल्को

गांव में छोड़ आये वो बड़ी सी हवेली शहरो में ढूंढते है वो एक सहेली आराम या हराम से जिए जा रहे है पर कौन समझाए की… Read more “ज़िन्दगी है एक पहेली – एम के पाण्डेय निल्को”

रविवारीय ज्ञान द्वारा एम के पाण्डेय निल्को

आज रविवार है आलस्य से भरा यह दिन मेरे लिए बातों की खिचड़ी पकाता है,  रविवार का दिन मेरे लिए शेयर मार्केट जैसा होता है कुछ भी… Read more “रविवारीय ज्ञान द्वारा एम के पाण्डेय निल्को”

जिजीविषा…..डायरी के पीले पन्ने (ii)

                              उस रात वो आई थी मेरे पास,संध्या के तुरंत बाद का का समय था | हवा चल रही,हम दोनों नदी के किनारे पर बैठे हुए थे… Read more “जिजीविषा…..डायरी के पीले पन्ने (ii)”