विजयी के सदृश जियो रे

वैराग्य छोड़ बाँहों की विभा संभालो चट्टानों की छाती से दूध निकालो है रुकी जहाँ भी धार शिलाएं तोड़ो पीयूष चन्द्रमाओं का पकड़ निचोड़ो चढ़ तुंग शैल… Read more “विजयी के सदृश जियो रे”

हे भ्रष्टाचार तोहार जय हो, विजय हो…

केन्द्रीय सतर्कता विभाग के पूर्व आयुक्त प्रत्यूष सिन्हा भ्रष्टाचार से चिन्तित हवन। उनकर कहनाम बा- ‘हर तीसरा भारतीय भ्रष्ट’। हम कहता हई रिटायर भइला के बाद काहे… Read more “हे भ्रष्टाचार तोहार जय हो, विजय हो…”