आज लिखने को कुछ नहीं – एम के पाण्डेय निल्को

सुना है तुम्हारे चाहने वाले बहुत हैं ये मोहब्बत की मिठाई सब में बांट देती हो क्या कई गिर चुके हैं तुम्हारे इश्क के मंजर में अंखियों… Read more “आज लिखने को कुछ नहीं – एम के पाण्डेय निल्को”

पराया हमें वो बताने लगे हैं

इशारे से सब कुछ जताने लगे हैंमुझे अपना अब वो बनाने लगे हैं। उठाया है मैने जिन्हें ज़िन्दगी भर,वही आज मुझको गिराने लगे हैं। बताते थे ख़ुद… Read more “पराया हमें वो बताने लगे हैं”

चांद अपनी चांदनी की रंगतों से डर गया

दिल हमारा जब तुम्हारी चाहतों से भर गया ।चांद अपनी चांदनी की रंगतों से डर गया ।। तेरी यादों में मेरे दिन रात कटते थे मगर।मेरी नजरों… Read more “चांद अपनी चांदनी की रंगतों से डर गया”

मैं फिर से ‘नज़र निल्को की’ ये शीर्षक ले कर आया हूँ

आज कई दिनो बाद फिर यहाँ पर आया हूँ इतने दिन व्यस्त रहा वो बताने आया हूँ आप याद किए या न किए हो पर मैं फिर… Read more “मैं फिर से ‘नज़र निल्को की’ ये शीर्षक ले कर आया हूँ”

गरीब बच्चो के संग लिया जन्मदिन का ‘आनंद’

 बड़े बड़े होटलो और रिहायसी जगह तो अपना जन्मदिन सभी मनाते है किन्तु आर्थिक रूप से कमजोर बच्चो के साथ ये कुछ और स्पेशल हो जाता है… Read more “गरीब बच्चो के संग लिया जन्मदिन का ‘आनंद’”

मुझ पर एहसान करती है – एम के पाण्डेय ‘निल्कों’

मुझ पर एहसान करती है ये कह कर बदनाम करती है किसी रोज पढ़ेगा कोई इन चन्द लाइनों को तो कोई कहेगा की तुमसे ही प्यार करती… Read more “मुझ पर एहसान करती है – एम के पाण्डेय ‘निल्कों’”

होंठ उसके जैसे गुलाब की पंखुड़िया

होंठ उसके चेहरे परकुछ यूँ नज़र आते हैजैसे कुछ गुलाब की पंखुड़ियापानी में नज़र आते है उसे देख कर तो कुछलड़के भी शरमाते हैनंबर लेना देना, आगे… Read more “होंठ उसके जैसे गुलाब की पंखुड़िया”

निल्को का ये उद्दघोष है

आप के समक्ष प्रस्तुत है ‘उद्दघोष’ पर एम के पाण्डेय निल्को का एक प्रयास*****************************मैंने खोया अब होश है देखोगो अब वो मेरा जोश हैबंद करो इन सापो… Read more “निल्को का ये उद्दघोष है”

मुक्तक विषय : आवारगी

मेरी ताज़ा मुक्तक विषय : आवारगी आवारगी होता क्या हैमेरी तरफ देख तेरा जाता क्या हैतुझे देख कर दिल डोले और बोलेमेरी बनने में तुझे होता क्या… Read more “मुक्तक विषय : आवारगी”