अभिव्यक्ति की आज़ादी पर उन्होंने लगा ही दिया बैन

अभिव्यक्ति की आज़ादीपर लगा कर बैनआ ही रहा होगाउनके दिल को चैनबोलने पर उन्होंनेभले लगाई पाबन्दी हैपर ‘निल्को’ हम तोलिखने के भी आदी हैइतनी आसानी से नहीं… Read more “अभिव्यक्ति की आज़ादी पर उन्होंने लगा ही दिया बैन”

मैं सुबह का अख़बार नहीं होता

मंगलवार की सुबहजल्दी ही नीद खुलीलगा हुआ किसी मुद्दे पर सुबहऔर किसी को जीत मिलीरूप का रंग का बाजार नहीं होताभले कमज़ोर हूँपर लाचार नहीं होता निल्को… Read more “मैं सुबह का अख़बार नहीं होता”

ये चन्द लाइने लिखने से क्या फ़ायदा- एम के पाण्डेय ‘निल्को’

‘ए दोस्त’ ज़रा मुझ पर रहमत की नज़र रखना मै भी तुंहरा ही हूँ इसकी तो खबर रखना  मुझ जैसे डूबने वालों को अब तेरा सहारा है… Read more “ये चन्द लाइने लिखने से क्या फ़ायदा- एम के पाण्डेय ‘निल्को’”

थोड़ा तो ठहर – एम के पाण्डेय निल्को

चेतावनी – दोस्तो आज एक मनगढ़त रचना आप के सामने पेश कर रहा हूँ इसका किसी भी जीवित व्यक्ति से कोई भी सम्बंध नहीं है यदि ऐसा… Read more “थोड़ा तो ठहर – एम के पाण्डेय निल्को”

नज़र निल्को की – तेरी नज़दीक वाली दूरिया

तेरी नज़दीक वाली दूरिया लगती है जैसे गोलिया तेरी हर अदा कुछ ख़ास नहीं पर सहती है हर एक बोलिया उसका बनना और सवरना जैसे हो पानी… Read more “नज़र निल्को की – तेरी नज़दीक वाली दूरिया”

ज़िन्दगी है एक पहेली – एम के पाण्डेय निल्को

गांव में छोड़ आये वो बड़ी सी हवेली शहरो में ढूंढते है वो एक सहेली आराम या हराम से जिए जा रहे है पर कौन समझाए की… Read more “ज़िन्दगी है एक पहेली – एम के पाण्डेय निल्को”

Valentine Special – आग लगे इस वेलेंटाइन डे को

क्या रोज डे क्या प्रपोज डे क्या करे प्रॉमिस डे को किसे किस करे किस डे को जब गर्ल फ्रेंड ही नहीं हमारी तो आग लगे इस… Read more “Valentine Special – आग लगे इस वेलेंटाइन डे को”

सोच रहा हूँ लिखू रानीखेत एक्सप्रेस की कहानी

दोस्तों अभी ट्रेन में सफ़र कर रहूँ और मन बेचैन हो रहा है । मुक्तक लिखने की सोचा तो विषय से भटक गया और मुक्तक की जगह… Read more “सोच रहा हूँ लिखू रानीखेत एक्सप्रेस की कहानी”

जिजीविषा…..डायरी के पीले पन्ने (ii)

                              उस रात वो आई थी मेरे पास,संध्या के तुरंत बाद का का समय था | हवा चल रही,हम दोनों नदी के किनारे पर बैठे हुए थे… Read more “जिजीविषा…..डायरी के पीले पन्ने (ii)”

डायरी के पीले पन्ने (i)…….tripurendra ojha ‘nishaan’

त्रिपुरेन्द्र ओझा ‘निशान’ ….. …… आज २३ जून की रात को ८.५० हुए हैं ,आज साल का सबसे चमकीला चाँद निकला है … खिड़की से देखता हूँ… Read more “डायरी के पीले पन्ने (i)…….tripurendra ojha ‘nishaan’”