कवि देवेन्द्र प्रताप सिंह "आग" की एक रचना

इन मीठे-मीठे पकवानों का किसको भोग लगाऊं मैं मेरे प्रभुजी हैं सीमा पर फ़िर कैसे खुशी मनाऊँ मैं दुश्मन की लंका जली नहीँ संहार अभी तक बाकी… Read more “कवि देवेन्द्र प्रताप सिंह "आग" की एक रचना”

आइये मनाये सार्थक दीपावली

पटाखो कि दुकान से दूर हाथों मे, कुछ सिक्के गिनते मैने उसे देखा… एक गरीब बच्चे कि आखों मे,मैने दिवाली को मरते देखा. थी चाह उसे भी… Read more “आइये मनाये सार्थक दीपावली”