ज़िंदगी तेरे नख़रे भी हजार है

ज़िंदगी तेरे नख़रे भी हजार है  क्यों तुम्हे दर्द से इतना प्यार है  कलम लिखने को बहुत बेक़रार है  क्योंकि इश्क खुद ही आज बीमार है  ज़िंदगी… Read more “ज़िंदगी तेरे नख़रे भी हजार है”

मुक्तक – जो भी तेरे पास आता है ।

जो भी तेरे पास आता हैवो तेरा ही हो जाता है तेरी उलझी सुलझी ये जुल्फ़ेमद मस्त होकर लहराता है–एम के पाण्डेय निल्को आपके अमूल्य सुझाव आमंत्रित… Read more “मुक्तक – जो भी तेरे पास आता है ।”

मुक्तक – सुबह जैसे ही आँख खुलती है

सुबह जैसे ही आँख खुलती है मानो एक शिकायत किया करती है भोर होते ही क्यू छोड़ देता है मुझको मेरी तनहाई मुझसे यही सवाल किया करती… Read more “मुक्तक – सुबह जैसे ही आँख खुलती है”

मुक्तक – तेरे चाहने वालों की बहुत आबादी है

तेरे चाहने वालों की बहुत आबादी है पर ‘निल्को’ को कहा लिखने पर पाबंदी है ये टूटे फूटे मन के भावो को पढ़कर भी लोग कहते है… Read more “मुक्तक – तेरे चाहने वालों की बहुत आबादी है”

मुक्तक – नज़र निल्को की मैंने शीर्षक ही रख लिया

दिल मे कोई प्रेम रत्न धन रख लिया उनके लिए लिख , उनका भी मन रख लिया ऐसी नजरों से घूरते है वो मुझको की ‘नज़र निल्को… Read more “मुक्तक – नज़र निल्को की मैंने शीर्षक ही रख लिया”

मुक्तक – चाँद की चादनी मे नहाती रही

चाँद की चादनी मे नहाती रही सारी रात मुझे वो जगाती रही प्यार से ज़रा छु लिया था होठो को उसके और ‘निल्को’ की धुन वो अब… Read more “मुक्तक – चाँद की चादनी मे नहाती रही”

आतंकियों का समर्थन करने वालों का विरोध करती मेरी नयी रचना

(आठ आतंकियों के एनकाउंटर के लिए पुलिस का समर्थन और आतंकियों का समर्थन करने वालों का विरोध करती मेरी नयी रचना)कवि – मयंक शर्मा (09302222285) खूब मनाई… Read more “आतंकियों का समर्थन करने वालों का विरोध करती मेरी नयी रचना”

आप सभी को नरक चतुर्दशी की हार्दिक शुभकामनाएं।

चतुर्दश वार।मिला सुतवार।।बढे धन कीर्ति।रहे यश शांति।।                 गजानन हाँथ।                सदा उर साथ।।                कटे सब कष्ट।                रहे  प्रभु  दृष्ट।। प्रदीप सुपर्व।मिले अमरत्व।।प्रकाश अपार।प्रहर्ष हजार।।                  जले जब… Read more “आप सभी को नरक चतुर्दशी की हार्दिक शुभकामनाएं।”

कवि देवेन्द्र प्रताप सिंह "आग" की एक रचना

इन मीठे-मीठे पकवानों का किसको भोग लगाऊं मैं मेरे प्रभुजी हैं सीमा पर फ़िर कैसे खुशी मनाऊँ मैं दुश्मन की लंका जली नहीँ संहार अभी तक बाकी… Read more “कवि देवेन्द्र प्रताप सिंह "आग" की एक रचना”

दीपक – मुक्तक

*****मैं   अँधेरों   से  लड़ा  हूँआँधियों से  भी खड़ा हूँतुच्छ मत कहना मुझे तूमोतियों  से  मैं  जड़ा हूं  !!!******************मुरारि पचलंगिया आपके अमूल्य सुझाव आमंत्रित है |

नज़र निल्को की…….

न दुपट्टा गिरा और न उसकी उम्मीदों के दुपट्टे गिरे,पर कुछ लोग उसके दुपट्टे गिराने मे कई बार गिरेसादरएम के पाण्डेय निल्को आपके अमूल्य सुझाव आमंत्रित है… Read more “नज़र निल्को की…….”

निल्को का ये उद्दघोष है

आप के समक्ष प्रस्तुत है ‘उद्दघोष’ पर एम के पाण्डेय निल्को का एक प्रयास*****************************मैंने खोया अब होश है देखोगो अब वो मेरा जोश हैबंद करो इन सापो… Read more “निल्को का ये उद्दघोष है”

मुक्तक विषय : आवारगी

मेरी ताज़ा मुक्तक विषय : आवारगी आवारगी होता क्या हैमेरी तरफ देख तेरा जाता क्या हैतुझे देख कर दिल डोले और बोलेमेरी बनने में तुझे होता क्या… Read more “मुक्तक विषय : आवारगी”

माँ

माँ जब मैं कहता था  या जब कुछ रटता था सबसे पहले याद भी हुई तुम सबसे जल्दी भूल भी गई तुम  इसमें तेरे संस्कार की नहीं… Read more “माँ”

शौक रहा दिल को उनके गुलाब लिखने का

“शौक रहा दिल को उनके गुलाब लिखने काबेदम से गुलशन में बेबस शबाब लिखने का “लकड़ियाँ चुन लाये मन की अलाव जलानेफिर भी न मिटा खुमार किताब… Read more “शौक रहा दिल को उनके गुलाब लिखने का”