नज़र निल्को की…….

न दुपट्टा गिरा और न उसकी उम्मीदों के दुपट्टे गिरे,पर कुछ लोग उसके दुपट्टे गिराने मे कई बार गिरेसादरएम के पाण्डेय निल्को आपके अमूल्य सुझाव आमंत्रित है… Read more “नज़र निल्को की…….”

निल्को का ये उद्दघोष है

आप के समक्ष प्रस्तुत है ‘उद्दघोष’ पर एम के पाण्डेय निल्को का एक प्रयास*****************************मैंने खोया अब होश है देखोगो अब वो मेरा जोश हैबंद करो इन सापो… Read more “निल्को का ये उद्दघोष है”

मुक्तक विषय : आवारगी

मेरी ताज़ा मुक्तक विषय : आवारगी आवारगी होता क्या हैमेरी तरफ देख तेरा जाता क्या हैतुझे देख कर दिल डोले और बोलेमेरी बनने में तुझे होता क्या… Read more “मुक्तक विषय : आवारगी”

माँ

माँ जब मैं कहता था  या जब कुछ रटता था सबसे पहले याद भी हुई तुम सबसे जल्दी भूल भी गई तुम  इसमें तेरे संस्कार की नहीं… Read more “माँ”

शौक रहा दिल को उनके गुलाब लिखने का

“शौक रहा दिल को उनके गुलाब लिखने काबेदम से गुलशन में बेबस शबाब लिखने का “लकड़ियाँ चुन लाये मन की अलाव जलानेफिर भी न मिटा खुमार किताब… Read more “शौक रहा दिल को उनके गुलाब लिखने का”

आलू पर कविता नहीं होता

कृपया ध्यान दे …! मधुलेश पाण्डेय “निल्को” की यह एक वयंगात्मक रचना है, इसका उद्देशय किसी तो ठेस पहुचाना बिलकुल नहीं है। ये कविता पढ़ना माना एक जुर्म है, पर… Read more “आलू पर कविता नहीं होता”

रातों के आईने को, मेरा सलाम करना

तेरे प्यार के महल में, वादे तमाम करना हो जाऊँ कैद उसमे ,कुछ इंतजाम करना धड़कन की हो दीवारें,साँसों की हो कतारेंसो जाऊं मैं सुकूँ से,दिले-एहतिमाम करना                                  … Read more “रातों के आईने को, मेरा सलाम करना”

खुले मंच पर देता हूँ चुनौती

हमारे मेसेज को पढ़कर के ग्रुप में आया एक तूफान कुछ लोगो के दिल मेंउठ गई एक उफानपलटकर दिया उन्होंने जवाबजैसे हड्डी बीच कवाबखुले मंच पर देता… Read more “खुले मंच पर देता हूँ चुनौती”

अभिव्यक्ति की आज़ादी पर उन्होंने लगा ही दिया बैन

अभिव्यक्ति की आज़ादीपर लगा कर बैनआ ही रहा होगाउनके दिल को चैनबोलने पर उन्होंनेभले लगाई पाबन्दी हैपर ‘निल्को’ हम तोलिखने के भी आदी हैइतनी आसानी से नहीं… Read more “अभिव्यक्ति की आज़ादी पर उन्होंने लगा ही दिया बैन”

दिल में कोई प्रेम रतन धन रख लिया

दिल में कोई प्रेम रतन धन रख लियाउनके लिए भी लिख, उनका भी मन रख दियापर ऐसी नज़रो से घूरते है वो मुझकोकी ‘नज़र निल्को की’ मैंने… Read more “दिल में कोई प्रेम रतन धन रख लिया”

मैं सुबह का अख़बार नहीं होता

मंगलवार की सुबहजल्दी ही नीद खुलीलगा हुआ किसी मुद्दे पर सुबहऔर किसी को जीत मिलीरूप का रंग का बाजार नहीं होताभले कमज़ोर हूँपर लाचार नहीं होता निल्को… Read more “मैं सुबह का अख़बार नहीं होता”

ये चन्द लाइने लिखने से क्या फ़ायदा- एम के पाण्डेय ‘निल्को’

‘ए दोस्त’ ज़रा मुझ पर रहमत की नज़र रखना मै भी तुंहरा ही हूँ इसकी तो खबर रखना  मुझ जैसे डूबने वालों को अब तेरा सहारा है… Read more “ये चन्द लाइने लिखने से क्या फ़ायदा- एम के पाण्डेय ‘निल्को’”