मुक्तक – सुबह जैसे ही आँख खुलती है

सुबह जैसे ही आँख खुलती है मानो एक शिकायत किया करती है भोर होते ही क्यू छोड़ देता है मुझको मेरी तनहाई मुझसे यही सवाल किया करती… Read more “मुक्तक – सुबह जैसे ही आँख खुलती है”

मुक्तक – तेरे चाहने वालों की बहुत आबादी है

तेरे चाहने वालों की बहुत आबादी है पर ‘निल्को’ को कहा लिखने पर पाबंदी है ये टूटे फूटे मन के भावो को पढ़कर भी लोग कहते है… Read more “मुक्तक – तेरे चाहने वालों की बहुत आबादी है”

मुक्तक – नज़र निल्को की मैंने शीर्षक ही रख लिया

दिल मे कोई प्रेम रत्न धन रख लिया उनके लिए लिख , उनका भी मन रख लिया ऐसी नजरों से घूरते है वो मुझको की ‘नज़र निल्को… Read more “मुक्तक – नज़र निल्को की मैंने शीर्षक ही रख लिया”

मुक्तक – चाँद की चादनी मे नहाती रही

चाँद की चादनी मे नहाती रही सारी रात मुझे वो जगाती रही प्यार से ज़रा छु लिया था होठो को उसके और ‘निल्को’ की धुन वो अब… Read more “मुक्तक – चाँद की चादनी मे नहाती रही”

हिन्दी भाषा उस समुद्र जलराशि की तरह है ,जिसमें अनेक नदियाँ मिली हों।

भारत देश एक बहुभाषी राष्ट्र है। जहाँ अंग्रेजी जैसी विदेशी भाषा के अतिरिक्त अनेक प्रकार की भारतीय भाषाएँ , उपभाषाएँ , आंचलिक भाषाएँ , बोलियाँ ,उपबोलियाँ आदि बोली जाती हैं। इन भाषाओं में हिंदी एकता… Read more “हिन्दी भाषा उस समुद्र जलराशि की तरह है ,जिसमें अनेक नदियाँ मिली हों।”

कृष्ण जन्माष्टमी

आदरणीय मित्रो ;नमस्कार;मेरी पहली भक्ति रचना  “कान्हा ओं कान्हा” आप सभी को सौंप रहा हूँ । मुझे उम्मीद है कि  मेरी ये छोटी सी कोशिश आप सभी को जरुर पसंद आएँगी,  रचना… Read more “कृष्ण जन्माष्टमी”

निल्को का ये उद्दघोष है

आप के समक्ष प्रस्तुत है ‘उद्दघोष’ पर एम के पाण्डेय निल्को का एक प्रयास*****************************मैंने खोया अब होश है देखोगो अब वो मेरा जोश हैबंद करो इन सापो… Read more “निल्को का ये उद्दघोष है”

मुक्तक विषय : आवारगी

मेरी ताज़ा मुक्तक विषय : आवारगी आवारगी होता क्या हैमेरी तरफ देख तेरा जाता क्या हैतुझे देख कर दिल डोले और बोलेमेरी बनने में तुझे होता क्या… Read more “मुक्तक विषय : आवारगी”

सूखा लोगों द्वारा ही पैदा किया गया?

प्रकृति और प्राणी दोनों ही एक दूसरे के सहचर हैं। दोनों मे से किसी एक के भी द्वारा पैदा किए गए असन्तुलन से दोनों को ही अस्वाभाविक… Read more “सूखा लोगों द्वारा ही पैदा किया गया?”

खुले मंच पर देता हूँ चुनौती

हमारे मेसेज को पढ़कर के ग्रुप में आया एक तूफान कुछ लोगो के दिल मेंउठ गई एक उफानपलटकर दिया उन्होंने जवाबजैसे हड्डी बीच कवाबखुले मंच पर देता… Read more “खुले मंच पर देता हूँ चुनौती”

ब्राह्मण है एक परंतु सरनेम अलग क्यों ?

मेरे एक मित्र ने मुझसे प्रश्न किया कि ब्राह्मणतो एक ही है परंतु कोई तिवारी है कोईदुबे है कोई शुक्ला पाठक चौबे आदि अलग – अलग नाम… Read more “ब्राह्मण है एक परंतु सरनेम अलग क्यों ?”

दिल में कोई प्रेम रतन धन रख लिया

दिल में कोई प्रेम रतन धन रख लियाउनके लिए भी लिख, उनका भी मन रख दियापर ऐसी नज़रो से घूरते है वो मुझकोकी ‘नज़र निल्को की’ मैंने… Read more “दिल में कोई प्रेम रतन धन रख लिया”