मुझ पर एहसान करती है – एम के पाण्डेय ‘निल्कों’

मुझ पर एहसान करती है ये कह कर बदनाम करती है किसी रोज पढ़ेगा कोई इन चन्द लाइनों को तो कोई कहेगा की तुमसे ही प्यार करती… Read more “मुझ पर एहसान करती है – एम के पाण्डेय ‘निल्कों’”

होंठ उसके जैसे गुलाब की पंखुड़िया

होंठ उसके चेहरे परकुछ यूँ नज़र आते हैजैसे कुछ गुलाब की पंखुड़ियापानी में नज़र आते है उसे देख कर तो कुछलड़के भी शरमाते हैनंबर लेना देना, आगे… Read more “होंठ उसके जैसे गुलाब की पंखुड़िया”

मैं सुबह का अख़बार नहीं होता

मंगलवार की सुबहजल्दी ही नीद खुलीलगा हुआ किसी मुद्दे पर सुबहऔर किसी को जीत मिलीरूप का रंग का बाजार नहीं होताभले कमज़ोर हूँपर लाचार नहीं होता निल्को… Read more “मैं सुबह का अख़बार नहीं होता”

चेहरे की वो बात – एम के पाण्डेय ‘निल्को’

चेहरे की वो बात अधूरी रह गई थी रात किनारे बैठे थे वे साथ डाले एक दूसरे मे हाथ कह रहे थे सुन रहे थे एक दूसरे… Read more “चेहरे की वो बात – एम के पाण्डेय ‘निल्को’”